डार्क वेब क्या है? इंटरनेट की अंधेरी दुनिया का रहस्य | What is Dark Web in Hindi

डार्क वेब क्या है? - Dark web in Hindi

इंटरनेट की एक अँधेरी दुनिया जिसके बारे में आम इंसानों को कुछ भी जानकारी नही होती, आज हम उसी के बारे में आपको बताने वाले हैं। हम बात कर रहे हैं डार्क वेब की जो की इन्टरनेट का एक ऐसा हिस्सा है जहाँ हम कभी जाते नही है।

आज जानेंगे की आखिर डार्क वेब क्या है (What is dark web in Hindi) और यह कैसे काम करती है और यहाँ क्या-क्या होता है।

डार्क वेब क्या है? (What is dark web in Hindi?)

इसे Dark net भी कहते हैं, यह इन्टरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब का ही एक हिस्सा है लेकिन  यह कोई छोटा सा हिस्सा नही है, इन्टरनेट का 96% हिस्सा डार्क वेब है लेकिन फिर भी सबको इस बारे में नही पता और इसके पीछे एक वजह यह भी है की हम वहां सीधे ब्राउज़र के जरिये नही पहुँच सकते।

डार्क वेब के सारे websites और contents encrypted यानि hidden होते हैं और ये गूगल जैसे सर्च इंजन से एक्सेस नही किये जा सकते।

दरअसल world wide web को हम तीन हिस्सों में बाँट सकते हैं:

  1. सरफेस वेब (Surface web)
  2. डीप वेब (Deep web)
  3. डार्क वेब (Dark web)

अब चलिए इन तीनो को थोडा विस्तार से समझते हैं।

Surface web क्या है?

  • आम तौर पर हम और आप रोजमर्रा की जिंदगी में इंटरनेट के जिस भाग का उपयोग करते हैं वह सरफेस वेब कहलाता है।
  • हम जितने भी वेबसाइट गूगल, बिंग, याहू जैसे सर्च इंजन के द्वारा एक्सेस करते हैं वे सभी इसी हिस्से में आते हैं।
  • आपको जानकर हैरानी होगी की पूरे इन्टरनेट का केवल 4% हिस्सा सरफेस वेब है। यानि इंटरनेट के मात्र 4% हिस्से का हम उपयोग करते हैं
  • ऐसे web pages जिन्हें कोई भी publicly access कर सकता है वेब इसी इन्टरनेट के इसी region में होते हैं।
  • इन site को open करने के लिए किसी विशेष software या configuration की जरुरत नही पड़ती और न ही किसी permission की आवश्यकता होती है।
  • इसे हम Google chrome, Firefox, Opera जैसे ब्राउज़र से आसानी से access कर पाते हैं।

Deep web क्या है?

  • इन्टरनेट पर मौजूद ऐसे वेब पेज जिन्हें सर्च इंजन index नही करता यानि search engine की पहुँच से ये बाहर होते हैं और उसे एक्सेस करने के लिए हमें लॉग इन करना पड़ता है।
  • इन pages को बिना अनुमति के नही देखा जा सकता।
  • जैसे आप अपने जीमेल अकाउंट में बिना लॉग इन किये ईमेल नही पढ़ सकते, बिना अकाउंट बनाये आप फेसबुक पर अपने फ्रेंड की profile page को नही देख सकते। दरअसल ये सारे web page डीप वेब के अंदर ही आते हैं।
  • इनके content को आप देख सकते हैं लेकिन उसके लिए आपके पास ID और password होने जरुरी हैं।

Dark web क्या है?

  • इसे हम साधारण ब्राउज़र से एक्सेस नही कर सकते।
  • और न ही हम गूगल के जरिये वहां तक पहुँच सकते हैं, हम किसी भी आम सर्च इंजन से इस एरिया में नही पहुँच सकते।
  • डार्क वेब में मौजूद websites के IP को tor encryption tool के जरिये एन्क्रिप्ट कर दिया जाता है यही वजह है की ये सर्च इंजन की नजर में नही आते।
  • इन छुपे हुए साइट्स तक पहुँचने के लिए एक विशेष प्रकार के ब्राउज़र जिसे Tor browser कहा जाता है का उपयोग किया जाता है।
  • इन sites तक वही लोग पहुँच सकते हैं जिनको इसके बारे में पता होता है।
  • ये अपराधियों और hackers का पसंदीदा जगह है जहाँ पर हर तरह के गैर कानूनी लेन-देन, ड्रग्स स्मगलिंग, पोर्नोग्राफी, हथियारों की खरीदी-बिक्री, मानव तस्करी, चोरी किये गये credit card details को बेचना जैसे अपराध होते हैं।

डार्क वेब की शुरुआत कैसे हुई –  History of Dark web in Hindi

डार्क वेब का इतिहास क्या है? अगर हम इस बारे में बात करें तो आप यह जानकर हैरान हो सकते हैं की दरअसल इस hidden web की शुरुआत लगभग इन्टरनेट के जन्म के समय से ही हो गयी थी। और तभी से इस ख़ुफ़िया नेटवर्क का उपयोग गैरकानूनी कामों के लिए किया जाता रहा है।

1970 के दशक में:
आपको ARPANET के बारे में जरुर पता होगा जो की internet से पहले बना था, दरअसल सन 1970 की दशक के शुरुआत में ही इस ARPANET नेटवर्क का उपयोग कर MIT के students को ड्रग्स बेचा गया था।

गौर करने वाली बात यह है की उस ज़माने में लोगों को इन्टरनेट के बारे में पता भी नही था और न ही ये publicly उपयोग के लिए उपलब्ध थे।

सन 2000 में:
डार्क वेब की असली शुरुआत सन 2000 में हुई जब Freenet launch हुआ जो की अभी भी अपनी service provide कर रहा है जिसके जरिये लोग अपनी पहचान छुपाकर एक-दुसरे से files share कर सकते हैं, फोरम पर chat कर सकते हैं और इसके अंदर वेबसाइट भी बना सकते हैं। इस नेटवर्क के अंदर लोगों को detect करना आसान नही होता।

2002 में:
डार्क वेब की दुनिया में एक बहुत बड़ी क्रन्ति तब आई जब 2002 में TOR यानि The Onion Router को रिलीज़ किया गया। यह एक प्रकार का browser है जिसके जरिये आप डार्क नेट के अंदर घुस सकते हैं।

आप इसे डार्क वेब का entry point समझ सकते हैं। dark net के websites को आप इसी TOR के जरिये access कर पाते हैं। यहाँ पर परत दर परत encryption होता है इसलिए यहाँ भी किसी की असली identity का पता लगाना मुश्किल होता है।

2009 में:
इससे पहले गैर कानूनी काम तो होते ही थे लेकिन पैसों का लेन-देन ख़ुफ़िया तरीके से करना आसान नही था क्योकि तब real cash का उपयोग होता था। लेकिन यह समस्या भी दूर हो गयी जब 2009 में Bitcoin नाम की cryptocurrency शुरू हो गयी। और आज डार्क नेट के black market में सारे काले कारनामे इसी bitcoin से खुले आम हो रहे हैं।

इस Dark net पर Online black market को रफ्तार देने का काम किया Silk road ने, जो की एक ऐसा platform बना जहाँ पर illegal तरीके से हर प्रकार के drugs बेचे जाते थे। लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है।

Dark web को कैसे access करें?

डार्क वेब को access करना उतना मुश्किल नही है जितना आप सोच रहे हैं। दरअसल यह बहुत ही आसान है लेकिन यहाँ अपने computer और data की सुरक्षा को लेकर थोड़ी परेशानी हो सकती है सुरक्षित तरीके से dark net को access करना थोडा मुश्किल है क्योंकि यहाँ कई सारी सावधानियां रखनी पड़तीं हैं।
चलिए जानते हैं आसान steps में की आखिर आप इसे कैसे access कर सकते हैं:
Step 1: VPN Software Install करें:
सबसे पहले आपको VPN install करना होगा यह बहुत ही जरुरी है। यह आपकी IP को छुपाने का काम करता है और encryption के जरिये आपको इन्टरनेट पर anonymous browsing करने की सुविधा देता है।
लेकिन इस बात का ध्यान रखें की VPN के लिए किसी अच्छे software का चुनाव करें ताकि वह अच्छी तरह से काम कर सके।
Step 2: TOR browser Install करें:
Dark net को हम chrome जैसी साधारण web browser से open नही कर सकते इसके लिए। यहाँ पर websites .com .net जैसे extension में नही होते ये .onion extension में होते हैं जिसे आप TOR browser से ओपन कर सकते हैं।
यहाँ ध्यान रखें की इसे हमेशा TOR project की official website से ही download करें और इसे हमेशा update करके रखें।
Step 3: Virtual machine software का उपयोग करें:
वैसे तो आप इसके बिना भी डार्कनेट पर जा सकते हैं लेकिन अपनी सुरक्षा बढाने के लिए आप virtual operating system यानी disposable OS create कर लें और उसी में ये सारे काम करें। इस काम के लिए आप Virtual box, VMware, Hyper-V जैसे tools का उपयोग कर सकते हैं।
ये सब configuration करने के बाद आप टोर ब्राउज़र में जाएँ और डार्क नेट पर प्रवेश करें। लेकिन यहाँ आपको साइट्स खोजने पड़ेंगे। वैसे तो यहाँ पर भी Google जैसे search engines होते हैं लेकिन डार्कवेब के ज्यादातर साइट्स indexed नही होते हैं इस लिए कई sites को आप इनकी मदद से नही ढूंढ सकते। फिर भी आप Hidden Wiki, Grams जैसे search engines का use कर सकते हैं।

 

क्यों खतरनाक है डार्क वेब – इससे क्या नुकसान हो सकता है?

वैसे तो ज्यादातर technologies इंसान अपने फायदे के लिए बनाता है लेकिन उसका गलत तरीके से उपयोग करने वाले भी बहुत लोग होते हैं, जो उस टेक्नोलॉजी की खूबियों को ही उसकी कमजोरी बना देते हैं और फिर उससे नुकसान होने लगता है। डार्क वेब के साथ भी ऐसा ही है, इसके उपयोग से कई सारे खतरे हैं, आइये जानते हैं उनके बारे में:

  • Virus और Malware का खतरा: आपको यहाँ suspicious links मिल सकते हैं जिसपर click करते ही वायरस या मैलवेयर जैसी चीजें आपके system पर install हो सकती हैं।
  • फिशिंग और स्कैम का खतरा: आपको यहाँ ऐसे कई सारे वेबसाइट मिल जायेंगे जो दिखने में तो असली की तरह लगते हैं लेकिन वे clone sites हो सकते हैं जिससे आपको धोखा भी हो सकता है।
  • आपका डाटा चोरी हो सकता है:  अगर आप थोड़ी भी लापरवाही बरतते हैं तो आपके computer से डाटा access कर चुराया जा सकता है और इससे आपको भरी नुकसान हो सकता है।
  • आपका वेबकैम हाईजैक हो सकता है: यानि hackers आपके डिवाइस के कैमरे को कुछ संदिग्ध programs install कर एक्सेस कर सकते हैं जिससे आपकी प्राइवेसी को खतरा हो सकता है।
  • कंटेंट जो आपको विचलित कर सकते हैं: यहाँ ऐसे साइट्स भी हैं जहाँ कुछ कंटेंट देखने में बहुत खरतनाक हो सकते हैं, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, जानवरों की हत्या, क्रूरता पूर्वक घटनाओं के दृश्य आपको प्रभावित कर सकते हैं।

 

क्या डार्क वेब के फायदे भी हैं? (Benefits of Dark Net in Hindi)

बिलकुल, जैसा की हमने बताया की ये टेक्नोलॉजी फायदे के लिए बनायी गयी थी और इसके कई सारे फायदे हैं जिसकी वजह से लोग इसका उपयोग करते हैं, तो चलिए जानते हैं उन फायदों के बारे में:

गुप्त तरीके से सर्फिंग करना (Anonymity): 
यहाँ आप अपनी पहचान छुपा कर डार्कनेट पर घूम सकते हैं और अपने काम कर सकते हैं। कई बार कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें करने के लिए identity protection की जरुरत पड़ती है ऐसे में ये आपकी private information को छुपाने में आपकी मदद करता है।

अगर आप इन्टरनेट पर कुछ भी करते हैं तो इसकी जानकारी सिर्फ आपको नही होती बल्कि आप जिस platform या वेबसाइट का उपयोग कर रहे हैं उसको भी आपकी जानकारी होती है जैसे फेसबुक पर जब आप लॉग इन करते हैं तो फेसबुक को इस बारे में पता होता है और यही नही Facebook बंद करने के बाद आप की साईट पर जा रहे हैं यह भी फेसबुक track कर सकता है, यही चीजें Google भी करता है, हालाँकि, ये ऐसा इसलिए करते हैं ताकि आपके interest को पहचान कर आपको relevant advertisements दिखाया जा सके।

लेकिन डार्क वेब पर आप थोड़ी सावधानी बरतें तो आपको कोई भी track नही कर पायेगा और यह आपकी निजी जानकारी को बचाने और privacy बनाये रखने के लिए फायदेमंद है।

अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of speech):
हमारे देश में हर इन्सान को अपनी बात कहने की आजादी है लेकिन कई देशों में यदि किसी संस्था, सरकार या किसी राजनैतिक पार्टी के खिलाफ कुछ कहा जाये तो ये उनके लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकती है और freedom fighters जैसे लोगों के लिए ये ख़तरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में इसका उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है।

Research और knowledge के लिए:
Doctors, scientists और रिसर्च स्टूडेंट्स के लिए यहाँ कई प्रकार के ऐसे study materials और literature मिल जाते हैं जो की साधारण वेब और सर्च इंजन पर नही मिलते है। कुछ रिसर्च जो पब्लिक डोमेन पर उपलब्ध नही होते वो भी यहाँ पाए जा सकते हैं।

Disclaimer

कृपया इस बात का ध्यान रखें की Dark web के बारे में जानकारियां हम केवल educational purpose के लिए दे रहे हैं। हम किसी को भी डार्क नेट पर जाकर गैर-कानूनी काम करने के लिए प्रोत्साहित नही करते हैं और WebinHindi इसके खिलाफ है। अगर आप इसका उपयोग करते हैं और आपको नुकसान होता है या आप किसी के साथ गलत करते हैं तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।

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हमें उम्मीद है की आपको समझ आ गया होगा की डार्क वेब क्या होता है (What is dark web in Hindi), और इसे कैसे access किया जाता है, इसके साथ ही इसके क्या फायदे और नुकसान हैं ये भी आपको पता चल चुका होगा। आपको dark net के बारे में जानकारी कैसी लगी हमें जरुर बताएं।

Vivek Vaishnav
Vivek Vaishnav

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