DBMS क्या है इसके प्रकार, लाभ, हानि, उपयोग और विशेषताएं | What is DBMS in Hindi?

इससे पहले हमने आपको डेटाबेस के बारे में बताया था की database क्या होता है और इसका क्या उपयोग है। आज हम बात करने वाले हैं DBMS यानि Database Management System (डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली) के बारे में।

इस article में आपको  DBMS से जुड़े कई सारे सवालों के जवाब मिलेंगे जैसे DBMS क्या है? इसका क्या इतिहास है? इसका कहाँ-कहाँ उपयोग होता है? डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली के फायदे और नुकसान, डीबीएमएस सॉफ्टवेयर के नाम, डीबीएमएस के लाभ और हानि आदि।

आजकल की टेक्निकल दुनिया में डेटाबेस का हर जगह उपयोग होता आपके मोबाइल में ही कई सारे डेटाबेस होते हैं, ईमेल, ऑनलाइन एप्प, गेम्स जैसे सभी सॉफ्टवेयर को चलाने के लिए डाटाबेस की जरुरत पड़ती है और उन्हें मैनेज करने के लिए डीबीएमएस का उपयोग किया जाता है। चलिए डीबीएमएस के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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DBMS क्या है? (What is DBMS in Hindi?)

DBMS का full form Database Management System है। इसके नाम से ही पता चल रहा है की इसका उपयोग डेटाबेस को manage करने के लिए किया जाता है।

दरअसल यह एक प्रकार का software होता है जिसकी मदद से database को create किया जाता है और उस डेटाबेस में data insert, update और delete जैसे task इसी सॉफ्टवेर की मदद से ही perform किये जाते हैं।

यह एक interface provide करता है जिसके जरिये user उस डेटाबेस में data insert और modify भी कर सकता है।

इसके अलावा किसी application द्वारा जरुरत पड़ने पर डेटाबेस को access किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए जब आप फेसबुक पर अपना account बनाते हैं तो आपके द्वारा enter की गयी सारी जानकारियाँ Facebook के database में store हो जाती हैं। इन जानकारियों को देखने के लिए आप Facebook के application या website का उपयोग कर सकते हैं जो की उस database से linked होते हैं।

Database Management System की विशेषताएं

किसी भी तरह के डेटा को स्टोर कर सकता है: एक डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम किसी भी तरह के डेटा को स्टोर करने में सक्षम होता है। यह नाम, और पते तक सीमित नहीं है। वास्तविक दुनिया में मौजूद किसी भी प्रकार के डेटा को DBMS में संग्रहित किया जा सकता है।

ACID Properties का support करना: कोई भी DBMS ACID (Atomicity, Consistency, Isolation, and Durability) जैसे गुणों का समर्थन करने में सक्षम है।

Data Redundancy को कम करना: यह normalization के नियमो का पालन करती है जिससे data redundancy यानि डाटा का बिना वजह दोहराव कम हो जाता है।

Backup और Recovery: Database Failure जैसी समस्याएं कभी भी आ सकती हैं। ऐसे समय में यदि डाटा को रिकवर नहीं किया जा सका तो निश्चित रूप से एक बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए सभी डेटाबेस backup और recovery की विशेषता होनी चाहिए।

Database Structure and Definition: एक डेटाबेस में केवल डेटा ही नहीं बल्कि डेटा की सभी संरचनाएं और परिभाषाएं भी होनी चाहिए। यह डेटा खुद दर्शाता है कि इस पर किस प्रकार के tasks perform की जानी चाहिए। यह data structre, type, format और उनके बीच के संबंध को दर्शाता है।

Data Integrity and Security: यह database की quality और विश्वसनीयता को बढाता है। यह डेटाबेस की unauthorized access को रोकता है और इसे अधिक सुरक्षित बनाता है।

Database Concurrency: इस बात की कई संभावनाएं हैं कि एक ही समय में कई उपयोगकर्ता या applications एक ही डेटा को एक्सेस कर रहे होंगे। ऐसे में समस्याएं आ सकतीं हैं लेकिन Concurrency control के जरिये डीबीएमएस उन्हें बिना किसी समस्या के डेटाबेस का उपयोग करने के लिए मदद करता है।

डीबीएमएस का कहाँ-कहाँ उपयोग होता है?

डीबीएमएस का उपयोग हर उस संस्थान में होता है जहाँ डाटा स्टोर करने की जरुरत होती है। ऐसे कई सारे जगहों पर डेटाबेस का उपयोग होता है जैसे:

  • बैंकिंग
  • रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम
  • एयरलाइन्स
  • लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम
  • स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी
  • सोशल मीडिया साइट्स
  • टेलीकम्यूनिकेशन
  • ऑनलाइन शौपिंग
  • मिलिट्री
  • एच आर मैनेजमेंट
  • मैन्युफैक्चरिं

Database Management Systems के components

डीबीएमएस सिस्टम के चार मुख्य घटक होते हैं:

  1. डाटा: डेटाबेस में स्टोर होने वाला डाटा जो की कोई number, character, date, या कोई logical value हो सकता है।
  2. हार्डवेयर: कंप्यूटर, स्टोरेज डिवाइस, इनपुट-आउटपुट डिवाइस आदि।
  3. सॉफ्टवेयर: ऑपरेटिंग सिस्टम, DBMS software, application programs आदि।
  4. यूजर: यहाँ पर इसके तीन प्रकार के यूजर हो सकते हैं:
    • Database Administrator (DBA): डेटाबेस का डिजाईन और मेंटेनेंस का काम करता है।
    • Application Programmer: ऐसे एप्लीकेशन प्रोग्राम का निर्माण करता है जिससे डेटाबेस का उपयोग किया जा सके।
    • End-user: जो अलग-अलग प्रकार के प्रोग्राम और application के मध्यम से डेटाबेस में से data को access करता है और insert, update, delete जैसे operations perform करता है।

DBMS Software के नाम

कुछ popular डीबीएमएस सॉफ्टवेयर के नाम कुछ इस प्रकार हैं:

  • MySQL
  • SQLite
  • Microsoft SQL Server
  • Oracle
  • Microsoft Access
  • dBASE
  • IBM DB2
  • PostgreSQL
  • Foxpro
  • MariaDB
  • NoSQL आदि।

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के प्रकार (Types of DBMS in Hindi)

DBMS मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते हैं:

  1. Hierarchical databases: इसका structure एक tree के सामान होता है जिसमें केवल एक root होता है। यहाँ पर relationship को child और parent के रूप में दिखाया जाता है। यहाँ एक parent के कई सारे child हो सकते हैं लेकिन एक child का केवल एक ही parent होता है। इस प्रकार के relationship को one-to-many relationship (1:N) कहा जाता है।
  2. Network databases: इस प्रकार के मॉडल में एक child के एक से अधिक parent भी हो सकते हैं। इस प्रकार के सम्बन्ध को many-to-many relationship कहा जाता है।
  3. Relational databases: इस DBMS model में डाटा को row और column के जरिये table के रूप में स्टोर किया जाता है। इससे data को खोजना बहुत ही आसान होता है। इसे रिलेशनल डेटाबेस इसलिए कहा जाता है क्योंकि कई सारे tables के बीच कुछ न कुछ सम्बन्ध होता है।
  4. Object-oriented databases: इस प्रकार केडेटाबेस में data को object के रूप में store किया जाता है। यहाँ दो या अधिक objects के बीच अलग-अलग प्रकार के relationships हो सकते हैं। ऐसे database को बनाने के लिए object-oriented programming language की जरुरत पडती है।

DBMS के लाभ (Advantages of DBMS in Hindi)

आइये डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली के फायदे के बारे में जानते हैं:

  • Data redundancy को कम करता है।
  • Authorized users के बीच database को share करना आसान है।
  • डाटा को secure रखना आसान है बिना permission या authorization के कोई भी डेटाबेस को access नही कर सकता।
  • Privacy का भी ख्याल रखा जा सकता है। Database Administrator यह तय कर सकता है की कौन सा यूजर किस level के data को access कर सकता है।
  • File processing system की तुलना में database में data ज्यादा consistent रहता है।
  • यह multi user environment को support करता है।
  • डेटाबेस में संग्रहीत डेटा हमेशा सही और सटीक होना चाहिए। सही डेटा को संग्रहीत करने के लिए integrity constraints का उपयोग किया जाता है क्योंकि कई सारे users हैं जो डेटाबेस में डेटा फ़ीड करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्रों द्वारा प्राप्त अधिकतम अंक कभी भी 100 से अधिक नहीं होने चाहिए।
  • Data atomicity बहुत ही महत्वपूर्ण है। DBMS में इस बात का ख्याल रखा जाता है की transaction हमेशा complete होना चाहिए। यदि कोई transaction अधूरा है तो उसे roll back कर दिया जाता है। जैसे यदि ऑनलाइन टिकट बुकिंग करते समय खाते से पैसे कट जाए और टिकट बुक न हो तो अपने आप पैसे refund हो जाने चाहिए।
  • DBMS की वजह से application development में भी बहुत ही कम समय लगता है।
  • Data migration की मदद से हम frequently use होने वाले data को कुछ इस तरह से store कर सकते हैं की उसे quickly access किया जा सके।

डीबीएमएस के नुकसान – Disadvantages of DBMS in Hindi

चलिए अब DBMS के limitations के बारे जानते हैं:

  • Hardware और software का cost अधिक हो सकता है।
  • DBA, application programmer, operators जैसे staffs जरुरत पड़ती है और इनको इसके लिए training देना जरुरी है।
  • कई बार यह बहुत ही complex system होता है।
  • DBMS काफी बड़ा सॉफ्टवेयर है, इसलिए इसे कुशलतापूर्वक चलाने के लिए system में बहुत सारी जगह और मेमोरी की आवश्यकता होती है।
  • जैसा कि हम जानते हैं कि DBMS में, सभी फाइलें एक ही डेटाबेस में संग्रहीत की जाती हैं, इसलिए database failure की संभावना अधिक हो जाती है। अचानक हुए failure से मूल्यवान डेटा की हानि हो सकती है।

DBMS का इतिहास (DBMS History in Hindi)

  • 1960: Charles Bachman ने पहला डीबीएमएस सिस्टम डिजाइन किया
  • 1970: Ted Codd ने आईबीएम के लिए Information Management System (IMS) बनाया जिसके लिए पहली बार relational model का उपयोग हुआ।
  • 1976: Peter Chen ने Entity-Relationship Model को गढ़ा और परिभाषित किया जिसे E-R Model के रूप में भी जाना जाता है।
  • 1980: रिलेशनल मॉडल पर आधारित DBMS का बहुत उपयोग होने लगा और SQL standard को ISO और ANSI द्वारा adopt किया गया।
  • 1985: Object-Oriented DBMS (OODBMS) विकसित हुआ।
  • 1990 के दशक में: Relational-DBMS में ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेशन का समावेशन हुआ। इससे Enterprise Resource Planning (ERP), Management Resource Planning (MRP), OLAP, Warehousing आदि का विकास हुआ।
  • 1991: Microsoft ने MS Access को एक personal DBMS के रूप में Windows में स्थापित किया।
  • 1995: पहला इंटरनेट डेटाबेस application का उपयोग हुआ।
  • 1997: XML ने डेटाबेस प्रोसेसिंग के लिए आवेदन किया। कई vendors XML को DBMS उत्पादों में integrate करना शुरू किया।

आगे पढ़ें:

DBMS का फुल फॉर्म क्या है?

डीबीएमएस का फुल फॉर्म “Database Management System” है।

कुछ प्रसिद्ध डीबीएमएस सॉफ्टवेयर के नाम बताइए?

MySQL, Microsoft Access, Oracle, PostgreSQL आदि।

डीबीएमएस के मुख्य घटक कौन-कौन से हैं?

डीबीएमएस सिस्टम के चार मुख्य घटक होते हैं: डाटा, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और यूजर।

उम्मीद है आपको यह आर्टिकल (DBMS क्या है?) पसंद आई होगी और डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के बारे में ये सारी जानकारियाँ आपके काम आएँगी।

Vivek Vaishnav
Vivek Vaishnav

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